अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी से घरेलू बाजार में
सोने अब तक की सबसे ऊंची कीमत पर आ गया है। दिल्ली सर्राफा बाजार में
मंगलवार को सोना 30750 रुपये के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर
और घरेलू मांग का भी सोने की कीमतों को बढ़ाने में खासा असर रहा है।
स्थानीय सर्राफा बाजार में सोना पिछले कारोबारी दिन के 30425 रुपए प्रति दस
ग्राम की तुलना में 325 रुपए चढकर 30750 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच
गया। इसके पहले 15 जून को ही सोना 30570 रुपए प्रति दस ग्राम के रिकार्ड
स्तर तक पहुंचा था। उधर, वायदा बाजार में सोने की कीमतों में सटोरियों के
बढ़ते रोल के बीच इसके दाम 30720 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच
गए हैं। वायदा बाजार में सोने की इस रिकॉर्ड कीमत का सबसे बड़ा कारण घरेलू
बाजार में इसकी बढ़ रही मांग है। वहीं शादियों के सीजन से भी दाम बढ़ने का
दबाव बना हुआ है। कमजोर रुपये से भी सोने की कीमतों पर असर पड़ा है।
एमसीएक्स में अक्टूबर के लिए सोने की कीमत अब तक के सबसे ऊंचे रिकॉर्ड को
छूते हुए 31000 के करीब पहुंच गई है। वहीं अगस्त माह के लिए इसकी कीमत
30428 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बोली जा रही है। दिलचस्प है कि सिंगापुर
में सोने की कीमतें 0.3 फीसदी की तेजी के साथ 1633 डॉलर प्रति औंस पर आ गई
हैं। इसको लेकर जानकारों का कहना है कि यूरो जोन संकट और सटोरियों की हलचल
के चलते सोने की कीमतों पर असर देखने को मिला है। आने वाले समय में भी ये
तेजी जारी रह सकती है।
Tuesday, June 19, 2012
हिना बनेंगी पाकिस्तान की नई प्रधानमंत्री?
इस्लामाबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को बड़ा झटका लगा है। वहां की सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को अयोग्य घोषित कर दिया है। इस आदेश के साथ गिलानी का बतौर प्रधानमंत्री पद खाली हो गया है और उनके नेतृत्व वाली कैबिनेट के फैसलों की कानूनी अहमियत खत्म हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश बीती 26 अप्रैल से लागू हुआ है। इसका मतलब है कि 26 अप्रैल के बाद गिलानी के नेतृत्व में उनकी कैबिनेट के तकरीबन सभी फैसले कानूनी तौर पर खारिज कर दिए गए हैं।
अदालती अवमानना का कसूरवार करार दिए जाने के बाद संविधान की हिफाजत का हवाला देकर अपने रुख और पद पर कायम रहने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बतौर सांसद अयोग्य ठहराकर जोर का झटका दे दिया और इसी के साथ यहां नया प्रधानमंत्री चुनने की कवायद भी शुरू हो गई है।
पाकिस्तान में करीब ढाई साल से न्यायपालिका और सरकार के बीच चल रहे टकराव के बीच प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा कि 26 अप्रैल को अदालती अवमानना का दोषी करार दिए जाने के बाद से ही प्रधानमंत्री के रूप में 60 साल के गिलानी का अध्याय खत्म हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को इस पद के लिए अयोग्य घोषित करने के साथ ही राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से नया प्रधानमंत्री नियुक्त करने के लिए कहा। उसने नेशनल असंबली की स्पीकर फहमीदा मिर्जा के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। उम्मीदों से उलट पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने गिलानी का साथ नहीं दिया और देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले को स्वीकार किया। उसने नए प्रधानमंत्री को चुनने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 26 अप्रैल के आदेश के बाद कोई अपील दायर नहीं किए जाने से दोषसिद्धि अंतिम है। ऐसे में सैयद यूसुफ रजा गिलानी मजलिस-ए-शूरा (संसद) की सदस्यता से अयोग्य हो गए हैं। पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि वह (गिलानी) उक्त तिथि से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी नहीं रहे हैं और प्रधानमंत्री पद भी इसी के मुताबिक खाली समझा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को खोलने में नाकाम रहने के कारण बीते 26 अप्रैल को गिलानी को अदालती अवमानना का दोषी करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान निर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि गिलानी की अयोग्यता को लेकर अधिसूचना जारी की जाए। सत्तारूढ़ पीपीपी ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से अपने नेता गिलानी को संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को स्वीकार करते हुए नया नेता चुनने के लिए कई बैठकें बुलाई हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उनके बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी की संयुक्त अध्यक्षता में आज हुई पीपीपी आलाकमान की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को स्वीकार करने का फैसला किया गया। सूत्रों का कहना है कि पीपीपी संसदीय दल और गठबंधन के सदस्यों की अलग-अलग बैठकें बुलाई गई हैं। इन बैठकों में गिलानी के स्थान पर दूसरे नेता का चुनाव किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक संघीय सरकार के मंत्रियों चौधरी अहमद मुख्तार, मखदूम शहाबुददीन और खुर्शीद शाह का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए संभावितों में शामिल माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बुधवार को संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली का सत्र बुलाया जाएगा और नए प्रधानमंत्री का औपचारिक चुनाव होगा। गिलानी को लेकर स्पीकर के फैसले का हवाला देकर चुनौती वाली संवैधानिक याचिकाएं पीएमएल-एन, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, वकील अजहर चौधरी और कुछ अन्य लोगों की ओर से दायर की गई थी। फहमीदा ने बीते 24 मई को गिलानी को सदन की सदस्यता से अयोग्य ठहराने से इंकार कर दिया था। पाकिस्तान में न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव की शुरुआत दिसंबर, 2009 में उस वक्त हुई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में भ्रष्टाचार के मामले में माफी से जुड़े प्रावधान को रद्द कर दिया था। मुशर्रफ शासन के उस फैसले से जरदारी सहित आठ हजार से अधिक लोगों को सीधा फायदा हुआ था। इसके बाद से ही सुप्रीम कोर्ट पाकिस्तान की सरकार पर लगातार दबाव बनाता रहा कि वह जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोले, लेकिन गिलानी राष्ट्रपति के लिए संवैधानिक छूट का हवाला देकर इसको टालते रहे। इसी क्रम में देश की सबसे बड़ी अदालत ने गिलानी को अदालती अवमानना का दोषी करार दिया।
Saturday, June 16, 2012
भिंड में लूट के इरादे से जमा हुए तीन आरोपी गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के भिंड जिला की पुलिस ने लूट के इरादे से इकट्ठा हुए तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके पास से तीन पिस्तौल बरामद की है.
नगर पुलिस अधीक्षक के.डी.सोनकिया ने
बताया कि मुखबिर की सूचना के आधार पर देहात थानान्तर्गत बीटीआई रोड स्थित
पुलिया के निकट से शनिवार को तीन बदमाश कल्लू उर्फ कंजा, दिलीप यादव और
आकाश शर्मा को गिरफ्तार किया गया.
उनके पास से पुलिस ने 32 बोर की एक पिस्तोल तथा 315 बोर के दो देशी कट्टे बरामद किये हैं.
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने इसी साल तीन जून को उमरी थानान्तर्गत ग्राम ढोंचरा में एक राहगीर से बाइक और 50 हजार लूटने की घटना के साथ ही अनेक लूट की वारदातें करना कबूल की हैं. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है.
उनके पास से पुलिस ने 32 बोर की एक पिस्तोल तथा 315 बोर के दो देशी कट्टे बरामद किये हैं.
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने इसी साल तीन जून को उमरी थानान्तर्गत ग्राम ढोंचरा में एक राहगीर से बाइक और 50 हजार लूटने की घटना के साथ ही अनेक लूट की वारदातें करना कबूल की हैं. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है.
ससुराल वालों की दरिंदगी, बहू के साथ करते थे घिनौना काम
जबलपुर। सर मेरी बहन ने ससुराल में बहुत कुछ सहा। उससे दो लाख रुपए, सोने की चेन और मोटर साइकिल की मांग की जाती थी, मांग पूरी न होने पर उसके साथ जमकर मारपीट की जाती थी और कई तरह से प्रताड़ित किया जाता था। परेशान होकर वह छह महीने मायके में ही रही, लेकिन बाद में उसे ससुराल वाले ले गए और जहर खिलाकर मार दिया गया।
रोते हुए जब अपनी और अपनी बहन की पीड़ा नरेन्द्र विश्वकर्मा ने बताई तो मौके पर उपस्थित लोगों की आंखें भी भीग गईं। नरेन्द्र ने बताया कि उसकी बहन अंजना विश्वकर्मा निवासी पनागर उड़िया की शादी गौर के समीप चौकरा गांव के मिलन विश्वकर्मा से वर्ष 2006 में हुई थी। शादी में अंजना को काफी दहेज दिया गया था, लेकिन ससुराल वाले अक्सर उसके साथ मारपीट करते थे और 2 लाख रुपए नकद, सोने की चेन और मोटर साइकिल लाने की मांग करते थे।
परेशान होकर अंजना मायके आ गई तो बाद में ससुराल वालों ने कुछ सामाजिक लोगों को बैठाया और समझौता कर अंजना को घर ले गए। हालांकि इसके बाद भी उसके साथ मारपीट होती रही। हाल ही में एक बार नरेन्द्र के पिता भी अंजना की ससुराल गए थे और आपत्ति जताई तो मिलन के बड़े भाई ने उनके साथ मारपीट की। उसके ऊपर एक बार मिट्टी तेल डालकर जलाने की कोशिश भी की गई। इस प्रकार लगातार मिल रही प्रताड़ना के बाद भी अंजना ससुराल में ही रही और गत रात्रि उसे जहर देकर मार दिया गया। उसे सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और इसकी जानकारी मायके पक्ष के किसी को नहीं दी गई, जब उसकी मृत्यु हो गई, तब आज सुबह जानकारी दी गई। हालांकि इस मामले में ओमती पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और जांच की जा रही है।
सबकुछ ठीक रहा तो रायसीना में होगी 'दादा'गीरी
दिल्ली। यूपीए चेयरपर्सन की हैसियत से सोनिया गांधी ने एलान किया कि प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद के लिए उनके उम्मीदवार हैं। सोनिया के एलान ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर छाए सस्पेंस को मिटा दिया। यूपीए की तरफ से उम्मीदवारी सामने आने के बाद कई दलों ने प्रणब के नाम का समर्थन कर दिया है। इस तरह वे रायसीना की रेस में फिलहाल सबसे आगे हैं और सबकुछ ठीक चलता रहा तो 25 जुलाई से रायसीना हिल्स स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रणब की ही 'दादा'गीरी चलेगी।
आपको बताते चलें कि कांग्रेस या उसकी सरकार में इंदिरा गांधी के जमाने से नंबर दो रहे प्रणब दा के अब देश के प्रथम नागरिक और महामहिम बनने का रास्ता साफ हो गया है। पिछले आठ वर्षो में संप्रग सरकार के सबसे बड़े संकटमोचक रहे दादा को छोड़ने का कठिन फैसला आखिरकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेना ही पड़ा। राहुल गांधी की इच्छा, पूरे देश में दादा के पक्ष में भावनात्मक ज्वार और मौजूदा सियासी हालात में प्रणब को सबसे सुरक्षित उम्मीदवार मानते हुए संप्रग की बैठक में उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।
इसके साथ ही कांग्रेस ने अब दादा के नाम पर सर्वसम्मति जुटाने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं। सपा के दादा के साथ आने के बाद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के चुनाव लड़ने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं। कांग्रेस ने भी कलाम से चुनाव न लड़ने की अपील कर दी है। वहीं प्रणब मुखर्जी को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के साथ बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समर्थन देने का एलान किया है। इस बाबत मुलायम सिंह व मायावती ने शुक्रवार को लखनऊ में पत्रकारों से वार्ता की।
Friday, June 15, 2012
मैं किसी के आगे नहीं झुकूंगीः ममता
कोलकाता ।। यूपीए द्वारा प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिए जाने के बाद जहां एक तरफ विभिन्न दलों में उनको समर्थन देने की होड़ लग गई है, वहीं तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी अपने रुख पर कायम हैं। ममता ने कहा है कि अब भी कलाम ही उनके उम्मीदवार हैं और वह किसी के आगे सिर नहीं झुकाएंगी।
गौरतलब है कि बदले हालात में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल के चुनाव लड़ने की संभावना काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा था कि जीत पक्की होने पर ही वह चुनाव लड़ेंगे। अब जब यूपीए के प्रत्याशी प्रणव मुखर्जी को समाजवादी पार्टी और बीएसपी दोनों का समर्थन मिल चुका है और कई दलों ने समर्थन की तैयारी दिखा दी है, तो उनकी जीत के आसार काफी बढ़ जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक कलाम के सवाल पर एनडीए में भी एक राय नहीं है। जेडी (यू) उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में नहीं बताया जाता। ऐसे में कलाम के चुनाव मैदान में उतरने की उम्मीद नहीं की जा सकती। हमारे सहयोगी समाचार चैनल टाइम्स नाउ ने तो सूत्रों के हवाले से खबर भी दे दी है कि कलाम चुनाव राष्ट्रपति चुनाव में खड़े नहीं होंगे।
मगर, इन सबके बावजूद ममता ने शुक्रवार शाम को पीटीआई से बातचीत में कहा कि वह कलाम की उम्मीदवारी पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रत्याशी अब भी कलाम ही हैं। देश-विदेश में उनका बहुत सम्मान है। वह इस पद के लिए सबसे काबिल शख्स हैं।
ममता ने कहा, 'मैंने आज तक किसी के आगे सिर नहीं झुकाया है और मैं आज भी नहीं झुकाऊंगी।'
राष्ट्रपति चुनाव: प्रणब मुखर्जी को यूपीए के सभी दलों का समर्थन
राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर शुक्रवार को यूपीए की बैठक में प्रणब के नाम पर सहमति बन गयी.
तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए अंतत: सत्ताधारी संप्रग ने शुक्रवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 77 वर्षीय मुखर्जी के नाम का प्रस्ताव संप्रग की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रखा.
करीब एक घंटे चली बैठक में पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले मुखर्जी के नाम पर मुहर लगी. सोनिया ने कहा कि संप्रग के घटक दलों के नेताओं की बैठक हुई जिसमें यह तय किया गया कि प्रणव मुखर्जी को भारत के राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाए.
सरकार के संकटमोचक माने जाने वाले मुखर्जी के नाम को लेकर सोनिया के प्रस्ताव पर घटक दलों के नेताओं ने मंजूरी दे दी. संप्रग की प्रमुख घटक तृणमूल कांग्रेस ने सपा के साथ मिलकर ए पी जे अब्दुल कलाम, सोमनाथ चटर्जी और मनमोहन सिंह का नाम लिया था. आज की बैठक में तृणमूल शामिल नहीं हुई.
सोनिया ने बैठक में बयान पढा, जिसमें कहा गया कि प्रणव मुखर्जी का सार्वजनिक जीवन का पांच दशक का बेहतरीन रिकार्ड है.
उन्होंने कहा कि प्रणव की उम्मीदवारी को लेकर व्यापक समर्थन है. संप्रग सभी राजनीतिक दलों और सभी सांसदों एवं विधायकों से अपील करती है कि वे राष्ट्रपति पद के लिए मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन करें.
सूत्रों के मुताबिक खबर यह भी आ रही है कि एनडीए ने भी प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने का एलान किया है.
यूपीए और एनडीए के रुख से अब पहले लगायी जा रही अटकलें सही साबित होती नजर आ रही हैं.
ज्ञात हो कि अटकले लगायी जा रही थी कि यूपीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन एनडीए करेगा और बदले में एनडीए के उप राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन यूपीए करेगा.
इससे प्रणब के राष्ट्रपति बनने और एनडीए उम्मीदवार मुरली मनोहर जोशी के उप राष्ट्रपति बनने का रास्ता लगभग साफ नजर आ रहा है.
वहीं, ममता के साथ रहे मुलायम सिंह यादव भी पूरी तरह से यूपीए के साथ आ गए हैं. अब इस मामले में ममता अलग-थलग पड़ती नजर आ रही हैं.
सपा ने भी किया समर्थन
समाजवादी पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने भी एलान किया है कि सपा का पूरा समर्थन प्रणव के साथ है.
बीजू जनता दल ने कहा है कि पीए संगमा ही उनके उम्मीदवार हैं.
सोनिया गांधी ने प्रणब के नाम का एलान करते हुए सभी दलों से समर्थन की अपील की है.
वाम दलों ने भी प्रणब मुखर्जी को अपना पूरा समर्थन देने का एलान किया है.
इस तरह से कुछ छोटे दलों को छोड़कर शेष लगभग सभी बड़े दलों ने प्रणब के साथ अपनी सहमति जतायी है.
अब देखना यह है कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी का फैसला करती हैं. वह प्रणब के नाम पर अपना समर्थन जताती हैं या फिर केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस लेती हैं.
प्रणब को समर्थन देशहित में: मायावती
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर प्रणब मुखर्जी के नाम का समर्थन किया.
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